हवेली का इतिहास
हवेली के अंदर का माहौल और भी डरावना होता जा रहा था। बाहर हवा तेज़ चल रही थी और टूटे हुए शीशों से आती हुई हवा की आवाज़ पूरे घर में गूँज रही थी।
अमन ने अपनी टॉर्च को थोड़ा ऊपर उठाया और चारों तरफ रोशनी घुमाई। दीवारों पर मोटी धूल जमी हुई थी। ऐसा लग रहा था जैसे इस हवेली में कई सालों से कोई नहीं आया हो।
तभी रोहित की नज़र एक पुरानी अलमारी पर पड़ी।
अलमारी आधी खुली हुई थी।
रोहित धीरे-धीरे उसके पास गया और अलमारी को पूरी तरह खोल दिया।
अंदर बहुत सारी पुरानी किताबें और कागज़ पड़े हुए थे।
लेकिन उनमें से एक किताब थोड़ी अलग लग रही थी।
उस किताब के ऊपर मोटे अक्षरों में लिखा था—
"काली हवेली का इतिहास"
अमन ने वह किताब उठाई और धीरे-धीरे उसके पन्ने पलटने लगा।
किताब में लिखा था कि कई साल पहले इस हवेली में एक बहुत अमीर आदमी रहता था जिसका नाम राजवीर सिंह था।
राजवीर सिंह के पास बहुत पैसा था और पूरे गाँव में उसका नाम था।
लेकिन गाँव के लोग उससे डरते भी थे।
क्योंकि लोग कहते थे कि राजवीर सिंह कुछ अजीब प्रयोग करता था।
रात में हवेली से अजीब आवाज़ें आती थीं।
कभी किसी के रोने की आवाज़…
कभी किसी के चिल्लाने की आवाज़।
एक रात अचानक हवेली में आग लग गई।
और उस आग में राजवीर सिंह और उसका पूरा परिवार मर गया।
उसके बाद से यह हवेली हमेशा के लिए बंद हो गई।
गाँव के लोग कहते थे कि उस रात कुछ ऐसा हुआ था जिसे किसी ने अपनी आँखों से नहीं देखा…
लेकिन उसके बाद से हवेली में अजीब घटनाएँ होने लगीं।
अमन ने किताब बंद कर दी।
सबके चेहरों पर डर साफ दिखाई दे रहा था।
सीमा धीरे से बोली—
"मुझे लगता है हमें यहाँ से अभी निकल जाना चाहिए।"
लेकिन तभी…
ऊपर की मंज़िल से फिर वही आवाज़ आई।
"ठक… ठक… ठक…"
जैसे कोई धीरे-धीरे चल रहा हो।
अब सबकी नज़र सीढ़ियों की तरफ चली गई।
– रहस्यमयी डायरी
अमन ने हिम्मत करके कहा—
"चलो ऊपर देखते हैं।"
सब धीरे-धीरे सीढ़ियाँ चढ़ने लगे।
सीढ़ियाँ बहुत पुरानी थीं और हर कदम पर अजीब आवाज़ कर रही थीं।
जब वे ऊपर पहुँचे तो उन्हें एक लंबा गलियारा दिखाई दिया।
गलियारे में कई दरवाज़े थे।
अचानक एक दरवाज़ा अपने-आप धीरे-धीरे खुलने लगा।
"चूँऽऽ…"
सब लोग वहीं रुक गए।
रोहित ने धीरे से टॉर्च की रोशनी उस कमरे में डाली।
कमरे के अंदर एक पुरानी मेज़ रखी थी।
मेज़ पर एक डायरी रखी हुई थी।
अमन धीरे-धीरे अंदर गया और डायरी उठाई।
डायरी के पहले पन्ने पर लिखा था—
"अगर कोई यह डायरी पढ़ रहा है… तो समझ लो कि तुम खतरे में हो।"
यह पढ़कर सबके रोंगटे खड़े हो गए।
अमन ने आगे पढ़ना शुरू किया।
डायरी में लिखा था कि राजवीर सिंह कुछ अलौकिक शक्तियों को बुलाने की कोशिश कर रहा था।
वह किसी आत्मा को अपने नियंत्रण में करना चाहता था।
लेकिन उसका प्रयोग गलत हो गया।
उस रात हवेली में एक बहुत भयानक चीज़ जाग गई।
डायरी की आखिरी लाइन पढ़कर सबकी साँस रुक गई।
उसमें लिखा था—
"अगर वह जाग गई… तो यह हवेली कभी शांत नहीं होगी।"
तभी अचानक पीछे से किसी के हँसने की आवाज़ आई।
एक बहुत डरावनी हँसी।
सबने तुरंत पीछे मुड़कर देखा…
लेकिन वहाँ कोई नहीं था।
सिर्फ अंधेरा।
और ऐसा लग रहा था जैसे कोई उन्हें अंधेरे से देख रहा हो।तहखाने का दरवाज़ा
डायरी पढ़ने के बाद सबके चेहरे पर डर साफ दिखाई दे रहा था। कमरे के अंदर सन्नाटा था, सिर्फ हवा की हल्की आवाज़ सुनाई दे रही थी।
अचानक राहुल ने कहा,
"मुझे लगता है हमें यहाँ से निकल जाना चाहिए।"
अमन ने सिर हिलाया,
"हाँ… लेकिन पहले हमें नीचे चलना होगा।"
सब लोग धीरे-धीरे कमरे से बाहर निकले और गलियारे से होते हुए सीढ़ियों की तरफ बढ़ने लगे।
जैसे ही वे सीढ़ियों के पास पहुँचे, रोहित अचानक रुक गया।
"रुको…!"
सबने उसकी तरफ देखा।
रोहित टॉर्च की रोशनी जमीन पर डाल रहा था।
वहाँ फर्श पर कुछ अजीब निशान बने हुए थे।
ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने गीले पैरों से चलते हुए निशान छोड़े हों।
लेकिन अजीब बात यह थी कि वे निशान सीधे दीवार तक जाकर खत्म हो रहे थे।
सीमा डर के मारे काँप गई।
"ये… ये किसके पैरों के निशान हैं?"
अमन कुछ बोल पाता उससे पहले ही अचानक नीचे से एक जोर की आवाज़ आई।
"धड़ाम!"
ऐसा लगा जैसे नीचे किसी ने भारी चीज़ गिरा दी हो।
अब सबकी नज़र सीढ़ियों की तरफ थी।
अमन ने धीरे से कहा,
"नीचे कोई है…"
सब लोग धीरे-धीरे नीचे उतरे।
जैसे ही वे नीचे पहुँचे, उन्हें एक चीज़ दिखाई दी जिसने उनके होश उड़ा दिए।
हॉल के बीच में फर्श थोड़ा खुला हुआ था।
और वहाँ नीचे जाने वाली पुरानी लकड़ी की सीढ़ियाँ दिखाई दे रही थीं।
अमन ने टॉर्च नीचे डाली।
नीचे सिर्फ अंधेरा था।
रोहित ने धीरे से कहा—
"शायद… यह तहखाना है।"
सीमा तुरंत बोली—
"नहीं… हम नीचे नहीं जाएंगे।"
लेकिन तभी नीचे से फिर आवाज़ आई।
"कोई है…?"
यह आवाज़ बहुत धीमी थी।
और ऐसा लग रहा था जैसे कोई बहुत दूर से बोल रहा हो।
अब सबकी साँसें तेज़ हो चुकी थीं।
अमन ने गहरी साँस ली और कहा—
"हमें देखना होगा।"
और फिर वह धीरे-धीरे तहखाने की सीढ़ियाँ उतरने लगा।
– अंधेरे में कोई
तहखाने की सीढ़ियाँ बहुत पुरानी थीं।
हर कदम पर लकड़ी चरमराने की आवाज़ कर रही थी।
नीचे का अंधेरा इतना गहरा था कि टॉर्च की रोशनी भी पूरी तरह नहीं पहुँच पा रही थी।
अमन सबसे आगे था।
उसके पीछे रोहित, राहुल, कविता और सीमा आ रहे थे।
जैसे ही वे नीचे पहुँचे, उन्हें एक बड़ा कमरा दिखाई दिया।
कमरे की दीवारें पत्थर की थीं और चारों तरफ मकड़ी के जाले लगे हुए थे।
लेकिन अचानक रोहित की टॉर्च एक चीज़ पर जाकर रुकी।
कमरे के बीच में एक पुरानी कुर्सी रखी हुई थी।
और उस कुर्सी पर…
कोई बैठा हुआ था।
सब लोग वहीं रुक गए।
उनकी साँसें जैसे रुक गई थीं।
अमन ने धीरे-धीरे टॉर्च की रोशनी उस चेहरे पर डाली।
वह एक बूढ़ा आदमी था।
उसके बाल पूरे सफेद थे और चेहरा बहुत डरावना लग रहा था।
अचानक उसकी आँखें खुल गईं।
और वह धीरे-धीरे हँसने लगा।
"हा… हा… हा…"
सीमा डर के मारे चिल्ला पड़ी।
लेकिन अगले ही पल कुछ ऐसा हुआ जिसे देखकर सबके पैरों तले जमीन खिसक गई।
वह बूढ़ा आदमी अचानक धुएँ की तरह हवा में गायब हो गया।
अब कमरे में सिर्फ खाली कुर्सी थी।
और दीवार पर एक नया संदेश लिखा हुआ था—
"तुम लोग यहाँ क्यों आए हो…?"
यह देखकर सब समझ गए कि अब यह सिर्फ एक पुरानी हवेली नहीं रही…
यह जगह किसी डरावनी शक्ति का घर बन चुकी है।
और अब शायद…
वे यहाँ से आसानी से बाहर नहीं निकल पाएंगे। अचानक गायब हुआ दोस्त
तहखाने के उस अंधेरे कमरे में सब लोग कुछ सेकंड तक बिल्कुल चुप खड़े रहे। किसी की भी हिम्मत नहीं हो रही थी कि कुछ बोले।
अभी कुछ ही पल पहले उन्होंने अपनी आँखों से उस बूढ़े आदमी को देखा था… और फिर वह अचानक हवा में गायब हो गया था।
सीमा की आवाज़ काँप रही थी।
"अमन… हमें यहाँ से अभी निकलना चाहिए…"
अमन खुद भी डरा हुआ था, लेकिन उसने खुद को संभालते हुए कहा,
"हाँ… शायद हमें वापस ऊपर चलना चाहिए।"
सब लोग धीरे-धीरे सीढ़ियों की तरफ बढ़ने लगे।
लेकिन तभी राहुल ने पीछे मुड़कर देखा… और अचानक रुक गया।
"रुको… रोहित कहाँ है?"
सब लोग तुरंत पीछे मुड़े।
वहाँ सिर्फ चार लोग खड़े थे।
रोहित कहीं दिखाई नहीं दे रहा था।
कविता घबराकर बोली,
"अभी तो यहीं था!"
अमन ने जोर से आवाज़ लगाई—
"रोहित…! रोहित…!"
लेकिन तहखाने में सिर्फ उनकी आवाज़ की गूँज सुनाई दे रही थी।
तभी अचानक दूर अंधेरे से एक आवाज़ आई।
बहुत धीमी…
जैसे कोई फुसफुसा रहा हो।
"बचाओ…"
वह आवाज़ रोहित की थी।
सब लोग तुरंत उस दिशा में दौड़े।
लेकिन जब वे वहाँ पहुँचे…
वहाँ कोई नहीं था।
सिर्फ दीवार पर खून से लिखा हुआ एक शब्द दिखाई दे रहा था—
"भाग जाओ।"
अब सबको समझ आ गया था कि यह जगह सिर्फ डरावनी नहीं… बल्कि खतरनाक भी है।
– खून से लिखा संदेश
दीवार पर लिखा हुआ वह शब्द देखकर सबके रोंगटे खड़े हो गए।
सीमा रोने लगी।
"हमें यहाँ नहीं आना चाहिए था…"
अमन भी अब डरने लगा था।
लेकिन उसने खुद को संभालते हुए कहा—
"रोहित को ढूँढना होगा।"
अचानक तहखाने की सारी टॉर्च एक साथ झिलमिलाने लगीं।
रोशनी कभी तेज़… कभी धीमी हो रही थी।
और तभी…
कमरे के कोने से किसी के चलने की आवाज़ आने लगी।
"ठक… ठक… ठक…"
सबकी नज़र उस तरफ चली गई।
अंधेरे में एक आकृति खड़ी थी।
वह धीरे-धीरे उनकी तरफ बढ़ रही थी।
जैसे ही रोशनी उसके चेहरे पर पड़ी…
सबकी चीख निकल गई।
वह रोहित था।
लेकिन उसका चेहरा बिल्कुल बदल चुका था।
उसकी आँखें पूरी तरह काली हो चुकी थीं।
और वह अजीब आवाज़ में बोला—
"तुम लोगों को यहाँ नहीं आना चाहिए था…"
– आईने का डरावना रहस्य
रोहित को उस हालत में देखकर सब लोग पीछे हटने लगे।
अमन ने डरते हुए कहा—
"रोहित… यह मज़ाक मत करो…"
लेकिन रोहित की हँसी सुनकर सबकी रूह काँप गई।
"हा… हा… हा…"
अचानक रोहित वहीं गिर पड़ा।
कुछ सेकंड बाद वह बिल्कुल सामान्य लगने लगा।
उसे कुछ भी याद नहीं था।
"क्या हुआ…? तुम लोग ऐसे क्यों देख रहे हो?"
अब सबको समझ नहीं आ रहा था कि अभी जो हुआ वह सच था या नहीं।
तभी कविता की नज़र दीवार पर लगे एक पुराने आईने पर पड़ी।
आईने में कुछ अजीब दिखाई दे रहा था।
उन्होंने मुड़कर देखा…
लेकिन वहाँ कुछ नहीं था।
फिर उन्होंने आईने में देखा…
आईने में उनके पीछे एक और परछाई खड़ी थी।
लेकिन जब वे पीछे मुड़े…
वहाँ कोई नहीं था।
अब यह साफ हो चुका था—
इस हवेली में कुछ ऐसा है जो सिर्फ दिखाई नहीं देता… लेकिन मौजूद है। please comment for my story and motivation from me for coming soon story's
